'कौन कहता है कि दौलत से ही जमाना है'
वाराणसी, मई 5 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के अंतर्गत काव्यार्चन का 59वां सत्र मंगलवार को अस्सी घाट पर आयोजित हुआ। वरिष्ठ गीतकार पं. सूर्यप्रकाश मिश्रा की अध्यक्षता में रचनाकारों ने विशिष्ट शैली में रचनाएं पढ़ीं। पं. सूर्यप्रकाश मिश्र ने समाज को गंभीर संदेश दिया। कहा-'रचना तुम पत्थर मत बनना, वाणी बनना स्पंदन की, साधारण अक्षर मत बनना...।' उन्होंने पढ़ा कि 'हे चिरंतन पथिक न्यारे, थक गए क्यों पग तुम्हारे, आस्था की सीढ़ियों तक, चुक गए संकल्प सारे...।' वरिष्ठ रंगधर्मी और कवयित्री राजलक्ष्मी मिश्रा 'मन' के संचालन में विदुषी सहाना ने पढ़ा-'विद्वान था प्रकांड वो विधान सारे जानता था, ब्राह्मण था ज्ञानी वो त्रिलोचन को मानता था...।' मृत्युंजय त्रिपाठी 'मलंग' ने सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित रचनाएं पढ़ीं। मंच संचालिका ने सुनाया-...
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