नई दिल्ली, मई 12 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार को कहा कि किसी योग्य महिला का अपने कॅरियर को आगे बढ़ाने और अपने बच्चे के लिए सुरक्षित एवं स्थिर वातावरण सुनिश्चित करने का निर्णय 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि एक परिवार अदालत द्वारा महिला के दंत चिकित्सक के रूप में अपने पेशेवर कॅरियर को 'क्रूरता' बताना एक 'सामंती' सोच और 'अति-रूढ़िवादी' दृष्टिकोण है। पीठ ने निचली अदालत और हाईकोर्ट के इन 'पिछड़े सोच वाले' निष्कर्षों को खारिज कर दिया और कहा कि पत्नी की पेशेवर पहचान पर किसी भी प्रकार का 'अप्रत्यक्ष वैवाहिक वीटो' लागू नहीं किया जा सकता। गुजरात हाईकोर्ट के परिवार अदालत के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी。 यह भी पढ़ें- छोटी कार और कम सोना लाने के ताने देना...