वाराणसी, अप्रैल 8 -- वाराणसी। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की ओर से काव्यार्चन की 55वीं कड़ी में मंगलवार को रचनाकारों ने काशी को केंद्र में रखकर रचनाओं का पाठ किया। अस्सी घाट पर आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पांडेय 'काशीकेय' ने की। उन्होंने काशी की महिमा को समर्पित ग़ज़ल 'कण-कण में देखिए यहां शंकर का वास है, काशी की पुण्य भूमि पर शिव का उजास है...' सुनाई। इसके बाद उन्होंने दूसरी ग़ज़ल सुनाई 'हम तो बस आपके सहारे हैं, आप ही से ये चांद तारे हैं...।' महिला रचनाकार सुषमा मिश्रा ने श्रोताओं से विशेष प्रशंसा बटोरी। उन्होंने धर्म के नाम पर होने वाले विभेद को अपनी रचना के केंद्र में रखा। वरिष्ठ रचनाकार जयशंकर सिंह ने भी बनारस से अपने लगाव को कुछ यूं व्यक्त किया- 'मेरा मन है बनारस में, मेरी रुह बनारस में, मेरी चाह बनारस में, मेरी आह बनारस मे...
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