नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कानून को इंसानी जिंदगी की हकीकतों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, खासकर ऐसे मामलों में जिनमें पारिवारिक रिश्ते अचानक टूट जाते हैं। शीर्ष अदालत ने सड़क दुर्घटना में मारे गए एक व्यक्ति के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की रकम बढ़ाते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सड़क हादसे में जब किसी व्यक्ति की मौत होती है और उसके आश्रित मुआवजे के लिए आवेदन करते हैं, तो कोई भी रकम उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। मुआवजा सिर्फ एक मोटा अनुमान है, जो आश्रितों पर वित्तीय बोझ कम करने का एक सांकेतिक प्रयास है। उदाहरण के लिए, साथ की बात करें। किसी प्रियजन के साथ के नुकसान की कीमत लगाना असंभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी, बच्चों या माता-प...