नई दिल्ली, मार्च 16 -- चंद्रशेखर का पता क्या बताऊं, उनका तो नाम ही आजाद है...। मैं भले ही मुसलमान हूं, पर मेरा मुल्क हिंदुस्तान है। काकोरी के नाट्य मंचन के दौरान ऐसे तमाम संवादों को सुन लोग देशभक्ति से रोमांचित होते नजर आए। मौका था 'काकोरी क्रांति गाथा' के नाट्य मंचन का। दिल्ली के मंडी हाउस में स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के अभिमंच सभागार में आयोजित इस मंचन में क्रांतिकारी राजेंद्र लाहिड़ी, रोशन सिंह ठाकुर, चंद्रशेखर आजाद और अशफाक उल्ला खान के किरदारों ने समां बांध दिया। काकोरी में अंग्रेजी हुकूमत के खजाने को क्रांतिकारियों द्वारा लूटने वाले प्रकरण का ऐसा जीवंत मंचन किया गया कि भारत माता की जय के नारों से हॉल गूंजने लगा। इस नाटक की पटकथा लिखने वाले रविशंकर ने कहा कि हमने सशस्त्र क्रांति का महत्व आज की पीढ़ी के सामने रखने के लिए इसे तैयार ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.