नई दिल्ली, जुलाई 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन राज्यों में उपभोक्ता मामलों की लंबित संख्या 1,000 से कम है, वे जरूरत के अनुसार कुछ जिला उपभोक्ता आयोग (जिला उपभोक्ता फोरम) का पुनर्गठन कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा करने से पहले संबंधित हाईकोर्ट की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ ने 22 जुलाई को पारित एक आदेश में यह निर्देश जारी किया। पीठ देशभर के उपभोक्ता आयोगों की कार्यप्रणाली, नियुक्तियों, सेवा शर्तों और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में कुल लंबित उपभोक्ता मामले 1,000 से कम हैं, वहां कुछ जिला उपभोक्ता आयोगों को बंद करके उनके मामलों की सुनवाई मौजूदा न्यायिक अधिकारियों को सौंपी जा सकती है। लेकिन इसके लिए संबंधित हाईकोर्ट की पहले से सहमति जरूरी ह...