'इस्लामिक NATO' क्या है, क्यों शामिल होना चाहता है बांग्लादेश और भारत के लिए कितनी टेंशन?
नई दिल्ली, अगस्त 22 -- दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नए रक्षा समीकरण की चर्चा तेज हो गई है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने इसी महीने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस डील को कुछ विश्लेषक 'इस्लामिक NATO' कह रहे हैं। इसकी वजह यह है कि समझौते में किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने को सभी सदस्यों पर हमला माना गया है। हालांकि, यह अभी NATO जैसा औपचारिक सैन्य संगठन नहीं है। समझौते का मकसद सदस्य देशों के बीच डिफेंस, सिक्योरिटी और मिलिट्री साझेदारी को मजबूत करना बताया गया है। पाकिस्तान ने इसे भविष्य में इस्लामी देशों के रक्षा सहयोग के मॉडल के रूप में भी पेश किया है। यह भी पढ़ें- पाकिस्तान में बड़े संकट की आहट! रावलपिंडी में अचानक क्यों उतारी गई सेना? अब इस गठबंधन का दायरा बढ़ाने की कोशिशों जारी हैं। इस बीच, बांग्...
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