नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ ने शुक्रवार को कहा कि आस्था के मामलों पर फैसला सुनाते समय जजों को अपने निजी धार्मिक विश्वास से ऊपर उठना चाहिए और अंतरात्मा की आजादी और बड़े संवैधानिक ढांचे से निर्देशित होना चाहिए। संप्रदाय की प्रथाएं न्यायिक जांच का विषय हो सकती हैं, इसके मद्देनजर संविधान पीठ ने यह टिप्पणी की। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली नौ जज की संविधान पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर सहित कई अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध और भेदभाव से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। यह भी पढ़ें- सबरीमाला...