वाराणसी, अप्रैल 5 -- वाराणसी। आधुनिक मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार में पीढ़ीगत अंतर, बदलते मूल्यों और पुरानी परंपराओं के साथ ही आधुनिकता के द्वन्द्व से जुड़े कई सवाल बहुत ही मजाकिया अंदाज में खड़े किए गए। मौका था नागरी नाटक मंडली में शनिवार से आरंभ ऑल इंडिया कल्चरल काउंसिल के राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतर्गत अंडे के छिलका के मंचन का। काशी की नाट्य संस्था कामायनी के बैनर तले मंचित इस नाटक में जहां प्रत्येक दृश्य हास्य के रंग में रंगा रहा वहीं नाटक का हर दृश्य कई अनुत्तरित प्रश्न दर्शकों के बीच छोड़ गया। दिखावे की संस्कृति के यथार्थ को उजागर करने वाले इस नाटक में परंपरा और आधुनिकता के बीच जंग भी दिखी। परिवार में नईपीढ़ी के सदस्य अपनी रुचियों, मसलन अंडे खाना, सिगरेट पीना, उपन्यास पढ़ना आदि काम एक दूसरे से छिपा कर पूरा करते हैं। मजे की बात यह है कि ...
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