नई दिल्ली, मार्च 4 -- होली के त्योहार पर गुजिया बनाने की परंपरा काफी पुरानी है। उत्तर भारत के लगभग हर घर में होली मनाने के साथ आटे की पूरियों में मीठा भरकर गुजिया तैयार की जाती है। पुराने समय में इन पूरियों में गुड़ में ड्राई फ्रूट्स मिलाकर भरा जाता था। वहीं समय के साथ इसमे खोवा, चीनी और ड्राई फ्रूट्स के साथ और भी कई चीजों की स्टफिंग की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली के त्योहार में गुजिया खाना और बनाना केवल एक प्राचीन परंपरा नहीं है बल्कि इसका आयुर्वेद से भी कनेक्शन जुड़ा हुआ है। वीशुद्ध नाम के इंस्टाग्राम पेज पर आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर निशांत गुप्ता ने जिक्र किया है कि आयुर्वेद की पुस्तक भावप्रकाशविघंटु में गुजिया खाने के फायदे और सही चीजों को मिलाकर बनाने का तरीका बताया गया है। फाल्गुन के मौसम में गुजिया खाने के शरीर को भी फायदे...
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