कानपुर, फरवरी 28 -- कानपुर देहात, संवाददाता। एक समय था जब होली के त्योहार पर लोग बेहद उत्साह से परंपरा के निर्वहन करते थे। हफ्तो पहले से गांवों में युवा होली बढ़ाने में जुट जाते थे, लेकिन अब युवाओं में होली बढ़ाने का उत्साह कम हो गया है। जबकि अतिक्रमण के चलते होली को बढ़ाने की परंपरा भी क्षीण हो रही है। इसके चलते गावों में बुजुर्ग इस परंपरा को जीवित रखने के लिए अपने जमाने के किस्से सुनाकर युवाओ को प्रेरित कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप गांवों में युवा होलियों का आकार ऊंचा करने में जुट गए हैं। करीब एक दशक पहले तक होली बढ़ाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह रहता था। गांवों में युवक एक पखवारा पहले से ही पेड़ों की लकड़ी एकत्र कर होलिका दहन स्थल पर जमा करना शुरू कर देते थे। पहले कई फुट ऊंचे ढेर बनाए जाते थे। इसके साथ ही होली जलने के पहले जब पूजन प्रक्रिया ...