नई दिल्ली, मार्च 4 -- होली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हवा में उड़ता चटख लाल या हरा गुलाल आपकी सांसों के लिए कितना घातक हो सकता है? फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ा रोग विशेषज्ञ) डॉ. अवि कुमार कहते हैं कि अक्सर होली के बाद अस्पतालों में सांस की तकलीफ लेकर आने वाले मरीजों की तादाद बढ़ जाती है। होली खेलने के लिए यूज किए जाने वाले रासायनिक रंग श्वसन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।कहां छिपा है खतरा ? बाजार में मिलने वाले चमकीले गुलाल सिर्फ रंग नहीं, बल्कि सिंथेटिक डाई, सीसा (Lead), क्रोमियम और पारा जैसे भारी तत्वों का मिश्रण होते हैं। जब ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचते हैं, तो शरीर में निम्न प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ब्रोंकोस्पाज्म (Bronchospasm): श्व...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.