भभुआ, फरवरी 28 -- शरीर की व्याधि दूर करने के लिए सम्मत में जलाते हैं उबटन की झिल्ली सम्मत गोसाईं की परिक्रमा कर उपला डाल होलिका दहन करते आ रहे लोग (पटना का टास्क) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। होली चार मार्च को मनाई जाएगी। अलग-अलग इलाके में होली की खास परंपरा होती है। कैमूर में भी कई तरह की परंपराएं प्रचलित हैं। कुछ परंपराएं आसपास के जिलों से मिलती-जुलती हैं और कुछ खास होती हैं। कैमूर जिले में जहां होलिका दहन स्थल के भष्म को एक-दूसरे के शरीर पर उड़ेलने की परंपरा रही है, वहीं उबटन की झिल्ली को जलाने की परंपरा रही है। होलरी भांजने, सिर में साफा बांध होरी, चहका, धमार, झुमर गाने की भी परंपरा पुरानी है। सम्मत गोसाईं की परिक्रमा कर उसमें परिवार के हर सदस्य के नाम से कंडा (उपला) भी डालने की परंपरा प्राचीन है। भांग-ठंडई पीने-पिलाने का भी दौर चलते रहता...
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