गोरखपुर, फरवरी 28 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। रंगों और आस्था का पर्व होली सामाजिक सौहार्द और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। होलिका दहन हमारी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन जरुरी है कि श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुरक्षा का भी ध्यान रखें। हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिता डॉ. अनिता अग्रवाल ने कहा कि अक्सर होलिका में दहन के पूर्व सूखी लकड़ी के साथ पॉलिथीन, प्लास्टिक और पुराने टायर भी जला दिए जाते हैं। इन वस्तुओं के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड, डाइऑक्सिन और अन्य जहरीली गैसें निकलती हैं, जो दमा, एलर्जी, आंखों में जलन और त्वचा रोग जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों व मरीजों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने अपील की कि होलिका दहन सनातन का धार्मिंक अनुष्ठान है, उसमें प्लास्टिक, पालिथीन, ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.