नई दिल्ली, मार्च 5 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। जीरो कार्बन एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव लंबा खिंचता है और ईरान हॉर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध रखना जारी रखता है, तो इसका सबसे गहरा असर एशिया पर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में इस जल मार्ग से होकर गुजरने वाले 84 प्रतिशत तेल और 83 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति एशियाई बाजारों तक पहुंची। इनमें चार देश चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया कुल तेल प्रवाह का 75 प्रतिशत और एलएनजी का 59 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। सबसे अधिक जोखिम में कौन है, विश्लेषण बताता है कि जापान की स्थिति सबसे संवेदनशील है। उसकी कुल ऊर्जा खपत का 87 प्रतिशत आयातित जीवाश्म ईंधनों से आता है। दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत है। इसके विपरीत चीन की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ल...
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