नई दिल्ली, अगस्त 3 -- भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर विवाद गलत नहीं। यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि टीम की पहचान और खेल परंपरा से जुड़ी गंभीर चिंताओं का संकेत है। जर्सी के रंग बदलने का विरोध वाजिब है और इसके पीछे कई मजबूत तर्क हैं। सबसे पहला तर्क यह है कि टीमों की जर्सी केवल कपड़ा नहीं होती, बल्कि वह एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक होती है। भारतीय हॉकी का गौरवशाली इतिहास, जिसमें अनेक ओलंपिक स्वर्ण पदक भी शामिल हैं, लंबे समय से एक खास रंग और पहचान से जुड़ा रहा है। ऐसे में, अचानक बदलाव से उस ऐतिहासिक निरंतरता को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरा, राष्ट्रीय टीम की जर्सी में ऐसे रंगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो देश की व्यापक पहचान और परंपरा को दर्शाए। यदि नया रंग किसी राजनीतिक, व्यावसायिक या वैचारिक प्रतीक...