हेमंत को शायद मल्हार समझ बरस पड़ी प्रकृति
वाराणसी, मार्च 28 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। 'होइहै वही जो राम रचि राखा...' यह पंक्ति अक्सर सुनने को मिलती है। शुक्रवार की शाम दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल परिसर में यह पुन: चरितार्थ हुईं। काशी संगीत कला महोत्सव की दूसरी निशा का वैदिक मंगलाचरण और गणेश वंदना से आगाज हो चुका था। मंच पर काशी के युवा कलकार नीरज मिश्र का सितार वदन हो रहा था। इसी बीच अचानक मौसम बदला। हवा के तेज झोकों के साथ आकाश में बिजली की चमक दिखने लगी। हवा थोड़ी मंद पड़ी तो फुहारों का आगमन हो गया। यह फुहार जल्द ही बूदाबांदी में तब्दील हो गई। अचानक रंगमंच की भांति दृश्य परिवर्तन हुआ। साउंड सिस्टम बंद करना पड़ा। इस परिस्थिति में धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने तत्क्षण निर्णय किया कि यह संगीतार्चन रुकेगा नहीं। अगली प्रस्तुति मणि मंदिर के मंडप में होगी...
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