हृदय से पुकारने पर ईश्वर स्वयं करते हैं रक्षा: पं.जगमोहन
मुजफ्फर नगर, मई 27 -- मुजफ्फरनगर भोपा रोड स्थित पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित जगमोहन भारद्वाज ने भावपूर्ण प्रसंग सुनाए। उन्होंने जय-विजय प्रकरण की कथा सुनाते हुए बताया कि वैकुंठ के द्वारपालों द्वारा ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों को रोकने पर उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस योनि में जाने का श्राप मिला।कथा व्यास ने हिरण्यकश्यप के अत्याचार और भक्त प्रहलाद की अनन्य भक्ति का वर्णन करते हुए बताया कि जब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के अनेक प्रयास किए, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर गोधूलि वेला में मुख्य द्वार की चौखट पर उसका वध किया। इसके बाद गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि जब मगरमच्छ ने हाथी को पकड़ा तो उसकी करुण पुकार पर श्रीहरि ने सुदर्शन चक्र से उसकी रक्षा की। वामन अवतार प्रसंग सुनकर श्रोता जयकारे लगाने लग...
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