अलीगढ़, अप्रैल 16 -- (विश्व हीमोफीलिया दिवस) अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। आठ साल की उम्र में आकाश जब बार-बार खेलते-खेलते बैठ जाता था, तो परिवार को लगता कि वह कमजोर या आलसी है। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत है। इलाज शुरू हुआ तो परिवार को भी भरोसा नहीं था कि बेटा सामान्य जीवन जी पाएगा। लेकिन आज वही आकाश 22 साल का हो चुका है और एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसका इलाज करने वाले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा बताते हैं कि सही समय पर इलाज शुरू होने से ही यह संभव हुआ। ऐसे कई बच्चों की आज भी काउंसलिंग जारी है।बच्चों यह भी पढ़ें- बेटी के मुकाबले बेटों को हीमोफीलिया का खतरा ज्यादा में खेलते समय बार-बार बैठ जाना, जल्दी थक जाना या मामूली चोट पर लंबे समय तक खून बहना, ये लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। जबकि, ...