देहरादून, जुलाई 25 -- पहाड़ खामोश हैं...लेकिन उनके भीतर बड़ा बदलाव हो रहा है। पहले भूकंप भूस्खलन जैसी आपदाओं के सिलसिले का संकेत होता था। लेकिन, अब बिना जमीनी हलचल के ही पहाड़ दरक रहे हैं। दून विवि और आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन से पता चला है कि 2010 के बाद आपदा का पैटर्न तेजी से बदला है। 2010 से पहले दो प्रमुख घाटियों में आए बड़े भूकंप प्राकृतिक आपदा के प्रमुख कारक थे। इसमें अलकनंदा-मंदाकिनी घाटी के चमोली जिले में 1999 का भूकंप (6.8 रिक्टर) और भागीरथी-यमुना घाटी के उत्तरकाशी में 1991 का भूकंप (6.6 रिक्टर) शामिल है। इन भूकंपों के बाद लंबे समय तक भूगर्भीय अस्थिरता बनी रही। लेकिन, अब बिना भूकंप ही भूस्खलन बढ़ रहे हैं। यह भी पढ़ें- अपराधी है CJP को समर्थन देने वाला जवान? पुलिस बोली- गैंगस्टर के साथ मिलकर.दून विश्वविद्यालय के ...