हिमालय बचाना है तो प्रकृति के प्रति बदलनी होगी अपनी सोच: श्रीमहंत रविंद्र पुरी
हरिद्वार, सितम्बर 8 -- हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत शृंखला नहीं, बल्कि भारत की जीवनरेखा, सनातन संस्कृति की आस्था और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। हिमालय से निकलने वाली नदियां देश की बड़ी आबादी की प्यास बुझाती हैं, जबकि इसकी गोद में बसे जंगल पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हिमालय का संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। यह बात हिन्दुस्तान हिमालय बचाओ अभियान के तहत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कही। उन्होंने लोगों से हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। यह भी पढ़ें- 565 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने लिया हिमालय संरक्षण का संकल्पप्राकृतिक आपदाएं और चेतावनी श्र...
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