नई दिल्ली, अक्टूबर 9 -- संतोष आर्यन, पिथौरागढ़ उच्च हिमालय के बर्फीले बुग्यालों से जान जोखिम में डालकर जुटाए जाने वाले लाल सोने यानि कीड़ा जड़ी के कारोबार पर चीन का ग्रहण लग चुका है। तीन साल पहले तक जिस कीड़ा-जड़ी का मूल्य धारचूला और मुनस्यारी ब्लॉकों के हजारों ग्रामीणों को 10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल रहा था, उसके दाम अब घटकर आधे यानी पांच लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गया है। दामों में आई इस 50 फीसदी की गिरावट के पीछे चीन का स्वदेशी स्तर पर शुरू किया गया कीड़ा-जड़ी का उत्पादन और वहां से घटती मांग को मुख्य वजह माना जा रहा है। सीमांत के नेपाल और चीन सीमा पर बसे धारचूला और मुनस्यारी ब्लॉकों के हजारों ग्रामीणों के लिए कीड़ा-जड़ी आजीविका का मुख्य स्रोत है। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में कांग्रेस की बड़ी जीत; निकाय चुनाव में BJP ...