नई दिल्ली, मार्च 16 -- हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद की रस्में और नियम बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों में मृतक की व्यक्तिगत वस्तुओं, विशेषकर कपड़ों के बारे में स्पष्ट निर्देश हैं। मृत्यु के समय व्यक्ति की अंतिम भावनाएं, मोह और अधूरी इच्छाएं उसकी वस्तुओं में ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती हैं। इसलिए जीवित व्यक्ति के लिए इनका इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। इससे पितृ दोष, नकारात्मक ऊर्जा और आत्मा की अशांति का खतरा रहता है। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार मृत परिजन के कपड़ों से जुड़े नियम और सही व्यवहार।मृतक की वस्तुओं में क्यों रहती है ऊर्जा? गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने बताया है कि मृत्यु के समय व्यक्ति की अंतिम भावनाएं, मन, बुद्धि और कर्म संस्कार वस्तुओं में स्थिर हो जाते हैं। कपड़े, आभूषण या अन्य व्यक्तिगत...
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