नई दिल्ली, जनवरी 21 -- हिंदू धर्म में पिता को परिवार का मुखिया, गुरु और देवता के समान माना गया है। पिता के रहते पुत्र का कर्तव्य है कि वह पिता के सम्मान और अधिकारों का पूर्ण रूप से पालन करे। शास्त्रों और परंपराओं में कुछ कार्य ऐसे हैं, जो पिता के जीवनकाल में पुत्र के लिए सख्त वर्जित माने जाते हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने से ना केवल पारिवारिक व्यवस्था बिगड़ती है, बल्कि पितरों और देवताओं की नाराजगी भी हो सकती है। आइए जानते हैं उन प्रमुख कार्यों के बारे में, जो पिता के जीवित रहते हुए पुत्र को कभी नहीं करने चाहिए।तर्पण और पिंडदान स्वयं ना करें पिता के जीवनकाल में पुत्र को पूर्वजों का तर्पण या पिंडदान स्वयं नहीं करना चाहिए। यह कार्य पिता का पहला अधिकार है। अगर पुत्र यह कर्म कर लेता है, तो यह परंपरा और पितृ ऋण के नियमों का उल्लंघन माना जाता ह...
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