जमशेदपुर, सितम्बर 16 -- जमशेदपुर। घोड़ाबांधा निवासी 34 वर्षीय सुशांत सुना की जिंदगी संघर्ष, साहस और जिजीविषा की मिसाल है। वर्ष 2014 में हुए सड़क हादसे में उनका बायां पैर कट गया। लंबे इलाज के बाद उन्होंने 1 जनवरी 2015 को कृत्रिम पैर के सहारे चलना शुरू किया। शुरुआती दौर में दर्द और त्वचा छिलने जैसी परेशानियां हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद सुशांत ने दौड़ना शुरू किया और झारखंड के पहले 'ब्लेड रनर' के रूप में पहचान बनाई। वर्ष 2018 में उन्होंने चेन्नई हाफ मैराथन की 21 किलोमीटर दूरी एक घंटे 45 मिनट में पूरी की। खेल के साथ पढ़ाई में भी उन्होंने सफलता हासिल की और एमबीए करने के बाद आईबीपीएस परीक्षा पास कर बैंक अधिकारी बने। रनिंग के अलावा साइकलिंग और रॉक क्लाइंबिंग करने वाले सुशांत अब कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह कर तिरंगा फह...