हाथरस, मई 13 -- हिन्दुस्तान खास हाथरस, गौरव भारद्वाज। शहर का अतीत बेहद शानदार रहा है। मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के समय में शहर के बीचों बीच टकसाल थी। इसमें तांबे और चांदी के सिक्के ढाले जाते थे। हालांकि वक्त की गर्दिश ने इस टकसाल का नाम-ओ-निशां मिटा दिया है। लेकिन इसमें ढले कुछ सिक्के यहां चंद लोगों के पास अभी भी निशानी के तौर पर मौजूद हैं। यह भी पढ़ें- सोने चांदी पर बढ़ी इम्पोर्ट ड्यूटी से कीमतों में आया उछाल मुगल शासकों की अहमियत मुगल शासकों ने अपने शासनकाल में हाथरस को खासी अहमियत दी थी। शाह आलम द्वितीय ने यहां की पारंपरिक चांदी कारोबार की ख्याति से प्रभावित होकर सिक्के ढालने के लिए सरकारी टकसाल की स्थापना की। वर्ष 1759 से लेकर 1806 तक यहां सिक्के ढाले जाते रहे हैं। शहर के पुराने लोगों के मुताबिक मोहल्ला रामजीद्वारा टकसाल स्थापित की ...