रांची, अप्रैल 24 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा से बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है और पहले दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा बहाल कर दी है। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी को दी जाने वाली सजा उसके दुराचार की गंभीरता के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि उसके परिणामों को देखकर। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता सीआरपीएफ का कांस्टेबल था, जिस पर नियुक्ति के समय अपनी वैवाहिक स्थिति और पत्नी से जुड़े आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप था। विभागीय कार्रवाई के बाद उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई थी। इसके खिलाफ जवान ने अपील दायर की। अपीलीय प्राधिकारी ने राहत देने के बजाय सजा को और कठोर बनाते हुए उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। ...
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