नई दिल्ली, मार्च 9 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एक पिता के इस दावे को 'बेहद अकल्पनीय' बताया कि उसकी नाबालिग बेटी ने उस पर दुष्कर्म का आरोप केवल गुस्से में आकर लगाया था। न्यायमूर्ति मनीष पिटाले और श्रीराम शिरसात की खंडपीठ ने उस व्यक्ति की उम्रकैद बरकरार रखते हुए, उसकी याचिका खारिज कर दी। याचिका में उसने मार्च 2020 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे कई मौकों पर अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के लिए पॉक्सो अदालत द्वारा उम्रकैद दी गई थी।याचिका में तर्क दिया गया कि उसकी बेटी ने उसे इसलिए फंसाया क्योंकि उसने उसे पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर किया था, जिसे उसने माता-पिता द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई बताया और जिसके कारण उसकी बेटी में नाराजगी पैदा हुई। हालांकि, हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि उसका यह सिद्धांत स्वीकार नहीं किया जा सकता क्...