विधि संवाददाता, जुलाई 8 -- यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि शरिया/मुस्लिम पर्सनल लॉ, जो किसी लड़की के विवाह के लिए यौवन अवस्था (किशोरावस्था) को उपयुक्त आयु मानता है, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और पाक्सो अधिनियम का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करता है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने अपने निर्णय में आगे टिप्पणी की कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए धर्म की परवाह किए बिना विवाह की आयु समान है, जैसा कि बाल विवाह निषेध कानून द्वारा स्पष्ट किया गया है। कोर्ट ने यह आदेश 19 व्यक्तियों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए किया, जिसमें उन्होंने पुलिस और चाइल्ड लाइन बचाव दल पर कथित रूप से हमला करने और उनके काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। बुलंदशहर में 16 वर्षीय मुस्...