नई दिल्ली, जुलाई 25 -- कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पहली शादी के कायम रहते हुए 'विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए), 1954' के तहत की गई दूसरी शादी को अमान्य ठहरा दी। न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम ने एक महिला की रिट याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। महिला ने याचिका में दावा किया था कि वह एक मृतक व्यक्ति की दूसरी पत्नी है। अदालत ने कहा कि जब पक्षकार स्वेच्छा से 'विशेष विवाह अधिनियम' के तहत शादी करने का विकल्प चुनते हैं, तो वे पूरी तरह से उस कानून के प्रावधानों से बंधे होते हैं और उसकी अनिवार्य शर्तों से बचने के लिए अपनी पसंद के अनुसार पर्सनल लॉ का सहारा नहीं ले सकते। याचिकाकर्ता ने संपत्ति बंटवारे के एक लंबित मामले में अपने मृतक पति की कानूनी प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होने की मांग की थी।

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