कन्नौज, अप्रैल 29 -- छिबरामऊ, संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ के हालिया फैसले ने कानून और समाज दोनों के लिए एक अहम संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परंपरा या प्रथा के नाम पर धन वसूली को कानूनी अधिकार नहीं माना जा सकता। यह मामला किन्नर समुदाय की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें बधाई लेने के लिए निश्चित क्षेत्र तय करने की मांग की गई थी, ताकि आपसी विवाद और तनाव रोका जा सके। इस संबंध में अधिवक्ता प्रणव कुमार सक्सेना ने बताया कि अदालत ने इस पर विचार करते हुए कहा कि देश में किसी से धन लेने का अधिकार केवल उसी को है, जिसे कानून ने मान्यता दी हो। परंपरा के आधार पर ऐसे अधिकार देना व्यवस्था को अव्यवस्थित कर सकता है। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि सामाजिक सम्मान और संवैधानिक अधिकार अलग विषय हैं, जबकि किसी से धन लेने का अधिकार अलग...
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