फरीदाबाद, फरवरी 11 -- फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के नगीना से आए हस्तशिल्पी मतलूब लकड़ी पर बारीक नक्काशी और इंल्ले (इनले) कार्य की सदियों पुरानी परंपरा को संजोए हुए हैं। थीम राज्य के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे मतलूब का दावा है कि नगीना की यह हस्तशिल्प कला एक हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी है। मुगलकाल से उनके पूर्वज इस कला से जुड़े रहे और शाही दौर में भी उनकी कारीगरी की विशेष पहचान रही है।मतलूब बताते हैं कि नगीना की वुड कारविंग अपनी महीन नक्काशी और लकड़ी में धातु अथवा अन्य सामग्री जड़ने की विशेष तकनीक के लिए जानी जाती है। इस कला में पारंपरिक डिजाइन, फूल-पत्तियों की आकृतियां और ज्यामितीय पैटर्न प्रमुख होते हैं। पहले यह कला शाही दरबारों और बड़े घरानों की पसंद हुआ करती थी, लेकिन अब बाजार का स्वरूप बदल गया है। हस्तशिल्प की जगह कंप्यूटर...