नई दिल्ली, अप्रैल 6 -- हस्तरेखा विज्ञान (Palmistry) में भाग्य रेखा को सबसे महत्वपूर्ण रेखाओं में से एक माना जाता है। यह रेखा व्यक्ति के भविष्य, उन्नति, बाधाओं, सफलता और जीवन की दिशा के बारे में गहराई से बताती है। इसे धन रेखा, शनि रेखा, प्रारब्ध रेखा और उर्ध्व रेखा के नाम से भी जाना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, भाग्य रेखा हमारे कर्मों का दर्पण है। यह स्थिर नहीं रहती, बल्कि व्यक्ति के कर्मों और जीवन की घटनाओं के साथ बदलती रहती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि हथेली में भाग्य रेखा कहां होती है और यह क्या-क्या संकेत देती है।भाग्य रेखा हथेली में कहां स्थित होती है? भाग्य रेखा आमतौर पर हथेली के निचले भाग यानी कलाई (मणिबंध) के मध्य से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ती है और मध्यमा उंगली के नीचे स्थित शनि पर्वत पर समाप्त होती है। यह रेखा हथेली को ...