हस्तकरघा परंपरा सांस्कृतिक चेतना और आत्मनिर्भरता की प्रतीक
बदायूं, अगस्त 10 -- नगर के मेरे राम आश्रम में आयोजित हैंडलूम उत्सव में भारतीय हस्तकरघा परंपरा, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता के महत्व पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। रवि समदर्शी महाराज ने कहा कि भारतीय हस्तकरघा परंपरा हमारी सनातन सांस्कृतिक चेतना, शिल्प-कौशल और श्रम-साधना की अनुपम अभिव्यक्ति है। हथकरघे पर तैयार होने वाले वस्त्र केवल परिधान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला, परंपरा और सृजनशीलता के जीवंत दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देकर स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों की आजीविका को मजबूत करें। देश की अर्थव्यवस्था को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह भी पढ़ें- 'हर घर तिरंगा अभियान' के लिए जीविका दीदियां तैयार कर रहीं राष्ट्रध्वज गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा, ...
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