विकासनगर, फरवरी 14 -- आर्य समाज मंदिर में मनाए जा रहे बोधोत्सव का शनिवार को समापन हुआ। समापन पर वैदिक ऋचाओं का सस्वर गायन किया गया। स्वास्तिवाचन के साथ हवन कुंड में आहुतियां डाली गईं। आचार्य प्रमोद ने महर्षि दयानंद के मूलशंकर से दयानंद बनने तक की घटना का वर्णन किया। कहा कि फागुन की शिवरात्रि समाज में बहुत प्रसिद्ध है। वेदों की अमृतवाणी में ईश्वर ने मनुष्य के जीवन का सार दिया है। भजनोपदेश के तहत कौन कहे तेरी महिमा कौन कहे तेरी माया..., गुणगान करो जगदीश्वर का जिसने यह जगत रचाया है..., गुरुदेव प्रतिज्ञा है मेरी पूरी करके दिखला दूंगा ... आदि भजनों से श्रोताओं को झूमने को मजबूर कर दिया। इस दौरान आर्य प्रतिनिधि सभा देहरादून की जिला प्रधान सोनेका वालिया, दयानंद तिवारी, भीर सिंह सिंधवाल, कुलदीप तोमर आदि मौजूद रहे।
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