अंबेडकर नगर, फरवरी 27 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। होली का उत्सव नजदीक है और पुरानी परंपरा कहीं नहीं दिख रही है। शायद ही कोई ऐसा गांव और मोहल्ला होगा जहां पुरानी परंपरा का निर्वहन किया जा रहा हो। बात हर घर में हर्बल रंग बनाने की है। पहले हर घर में हर्बल रंगों का निर्माण होता था। हर्बल रंगों के निर्माण से अब हर परिवार ने हाथ खड़ा कर लिया है। पहले बसंत पंचमी के बाद घर घर में हर्बल रंगों का निर्माण होता था। करीब दो दशक पूर्व तक अधिकांश घरों में होली के लिए हर्बल रंगों का निर्माण होता था। हर्बल रंग हल्दी और गेंदा के फूलों से बनाया जाता था। स्व निर्मित हर्बल रंग से पूरा परिवार हर्षोल्लास के साथ होली का पर्व मनाता था। हर्बल रंगों का प्रयोग एक दूसरे पर करके सभी को रंगीन करने की परंपरा का निर्वहन होता था। अब लोगों ने हर्बल रंगों के निर्माण से ही तौब...
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