बिहारशरीफ, अप्रैल 17 -- धरती पुत्रों की व्यथा 07 : हर साल 10 फीसद बढ़ जाती है लागत पर उस अनुपात में कीमत नहीं मिलती बाजार की अनिश्चितता के कारण मुनाफे पर मंडराता रहता है संशय के गहरे बादल जलवायु परिवर्तन से रूठीं नदियां और आहर-पइन, 4 माह में ही सूख रही जलधारा मौसत छोड़ रहा अन्नदाताओं का साथ, बिजली और निजी बोरिंग के भरोसे खेती फोटो खेती : सरदार बिगहा के पास खेत में लहलहाती भिंडी की फसल। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। धरती पुत्रों की व्यथा सीरीज के सातवें अंक में आज खेती की बढ़ती लागत, सिकुड़ते प्राकृतिक संसाधनों, संसाधन का अभाव और बाजार के उस चक्रव्यूह की पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें किसान हर साल फंसते हैं। यह भी पढ़ें- बढ़ते खर्च और गिरते मुनाफे ने बढ़ाई किसानों की चिंता एक तरफ जहां खेती के आधुनिक साधनों और मशीनों का दायरा बढ़ा है, वहीं जलवायु परि...
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