मैनपुरी, जुलाई 7 -- बेवर। महज 18 साल की उम्र में जितेंद्र ने फांसी लगाई तो उसके पिता का कलेजा फट गया। परिवार में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले पांच वर्षों में आठ लोगों की जान इसी तरह गई। परिवार में हो रही मौतों की वजह भी बड़ी अजीब है। कोई शराब पीकर मर गया तो कोई परिजनों से नाराज होकर फांसी पर लटक गया। रामवरन और उनके पिता हीरालाल ये समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनके परिवार के सदस्यों को हो क्या गया है। लगभग हर साल एक मौत हो रही है। परिवार में दो दिन पहले जितेंद्र ने फांसी लगाई तो लगा कि अब शायद इस परिवार में कोई नहीं बचेगा। मौत की वजह कुछ भी हो, लेकिन इलाके में इस परिवार की ही चर्चा है। बीस साल पहले परिवार के एक सदस्य की ससुराल में फांसी में लटकने से मौत हुई तो उसे हत्या माना गया। मगर पुलिस रिकॉर्ड में इसे आत्महत्या दर्ज किया गया। इसके...
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