हर बात का जवाब देना पड़ सकता है भारी! आचार्य चाणक्य से जानें, कब चुप रहना है समझदारी
नई दिल्ली, सितम्बर 19 -- आज का सुविचार, 19 सितंबर 2026: हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता, कई बार सही समय पर रखी गई चुप्पी ही सबसे समझदारी भरा जवाब बन जाती है। शब्द सोचकर बोलें, क्योंकि कही हुई बात वापस नहीं आती है। हम अक्सर सामने वाले की बात सुनते ही उसका जवाब देने लगते हैं। कई बार प्रतिक्रिया इतनी जल्दी होती है कि बाद में समझ आता है कि बात को थोड़ा रुककर समझना बेहतर होता। आचार्य चाणक्य की नीतियों में भी वाणी पर नियंत्रण और सही समय पर मौन रहने को महत्व दिया गया है। उनका मानना था कि बिना सोचे बोले गए शब्द परेशानी बढ़ा सकते हैं और रिश्तों में ऐसी दरार डाल सकते हैं, जिसे भरना आसान नहीं होता है। इसलिए कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जहां बोलने से ज्यादा चुप रहना समझदारी मानी जाती है।गुस्सा आए तो पहले खुद को शांत करें गुस्से में इंसान कई बार...
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