कानपुर, अप्रैल 24 -- कानपुर, आशीष दीक्षित जेब में रखा मोबाइल भले ही खामोश हो, लेकिन दिमाग उसे बार-बार टटोलने को मजबूर करता है। हर दो-तीन मिनट में स्क्रीन ऑन करना अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि खुराफात यानी हार्मोन के खेल का नतीजा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की केस स्टडी ने इस छुपे कनेक्शन को उजागर किया है, जिसमें मोबाइल इस्तेमाल और हार्मोन के बीच सीधा रिश्ता सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक, बार-बार स्क्रीन देखने की इस बेचैनी के पीछे डोपामाइन हार्मोन का तेज उतार-चढ़ाव जिम्मेदार है, जो दिमाग को बार-बार 'रिवार्ड' पाने के लिए उकसाता रहता है।मोबाइल पर नोटिफिकेशन या नया कंटेंट दिखाई देता है, तो दिमाग में डोपामाइन हार्मोन तेजी से बढ़ता है। यह वही हार्मोन है जो खुशी और संतुष्टि का अहसास कराता है। बार-बार इसका बढ़ना दिमाग को "रिवॉर्ड" की आदत डाल देता है...