लखनऊ, जुलाई 29 -- लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग प्रदेश के प्रत्येक जिले की गोशालाओं का मूल्यांकन कराएगा। इसमें वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश के स्वास्थ्य एवं पोषण, नस्ल संवर्धन, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता के प्रयास प्रमुख आधार होंगे। गोशालाओं में वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता, भूसा-चोकर का उचित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, नर-मादा एवं बछड़े-बछियों का वैज्ञानिक वर्गीकरण, नंदीशाला की व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रजनन प्रणाली को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। यह भी पढ़ें- प्रत्येक जिले में मॉडल गोशाला एवं बायोगैस मॉडल ग्राम विकसित किए जाएंगेगोशालाओं की बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा इसके साथ ही सिक वार्ड, नियमित पशु चिकित्सा, कमजोर गोवंश की पृथक देखभाल, पर्याप्त शेड, स्वच्छता, सीसीटीवी, बाउंड्री वॉल और ...