हरित पटाखों को लेकर इतनी हाय-तौबा क्यों
नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- दीपंकर साहा,पूर्व अतिरिक्त निदेशक, सीपीसीबी नई पीढ़ी के हरित पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुखद है। अदालत ने तय मानक और संरचना का पालन करने वाले हरित पटाखों को बनाने और बेचे जाने की बात कही है। यह समझना चाहिए कि किसी भी व्यवस्था की सफलता उसके प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ बचाव संबंधी निर्देशों पर निर्भर करती है। शीर्ष अदालत के इस निर्देश में नियंत्रण और बचाव, दोनों की झलक दिखती है। उसने हरित पटाखों की वकालत की है, यानी पटाखों में रसायनों का कम इस्तेमाल होना चाहिए, जो बचाव के उपाय हैं, जबकि इसे जलाने की समय-सीमा तय करके उसने प्रदूषण पर नियंत्रण का प्रयास किया है। पटाखा बनाने का एक तय ढर्रा है। इसमें पोटेशियम नाइट्रेट, पोटेशियम क्लोरेट, पोटेशियम परक्लोरेट जैसे ऑक्सीकरण एजेंट होते हैं, जो ज...
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