नयी दिल्ली, अगस्त 17 -- यह शरारत कुछ हंसी-मजाक के इरादे से की गई थी, लेकिन इस बीच ड्रामा इतना गंभीर हो गया कि एक अनुभवी भारतीय कप्तान ने पूरी तरह से आहत होकर अपना पद छोड़ने की पेशकश कर दी।यह 2005 का अप्रैल फूल का दिन था, जब कोच्चि में पाकिस्तान के खिलाफ एक दिवसीय श्रृंखला की शुरुआत से पहले भारतीय टीम को अभ्यास करना था। भारतीय खिलाड़ियों पर निश्चित रूप से उम्मीदों का बोझ था। ऐसी स्थिति में युवराज सिंह ने हरभजन सिंह के साथ मिलकर फैसला किया कि तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के साथ शरारत करना ड्रेसिंग रूम के माहौल को हल्का करने का सबसे अच्छा तरीका होगा। वे नकली अखबार की कतरनें लेकर अंदर आए जिनमें गांगुली ने अपने साथियों को अय्याश, गैर-जिम्मेदार और लापरवाह बताया था। ये कतरनें इतनी असली लग रही थीं कि आमतौर पर शांत रहने वाले 'प्रिंस ऑफ़ कोलकाता' भ...