नई दिल्ली, मार्च 31 -- मनु जोसेफ, पत्रकार और उपन्यासकार भारत के किशोर लेग-स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन को 1980 के दशक में बहुत पसंद किया जाता था। एक समय था जब उनकी गिनती देश के होनहार खिलाड़ियों में होती थी, लेकिन कुछ समय में ही वह सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और बाद में कमेंटेटर के तौर पर वापस आए। कुछ दिन पहले, उन्होंने यह कहते हुए कमेंट्री छोड़ दी कि सांवले रंग की वजह से उन्हें लगातार नीचा दिखाया जाता है। उनकी बातें सच लगीं। लक्ष्मण ने कहा कि ताकतवर लोग उन्हें फोटो सेशन के समय नहीं आने देते थे और टॉस के लिए बुलाने से हिचकते थे। उन्हें प्रकारांतर से एहसास कराया गया कि उनकी शक्ल-सूरत आकर्षक नहीं है। उन्होंने इस बारे में मीडिया के सामने खुलकर बात की और कहा कि उनकी जिंदगी हमेशा से ऐसी ही रही है। तब भी जब वह एक युवा क्रिकेट स्टार थे। भारत में...