नई दिल्ली, अप्रैल 1 -- जितेंद्र सिंह, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री कल्पना करें, राजस्थान के दूरदराज में जिलाधिकारी को ऐसी महत्वाकांक्षी कल्याण योजना की जिम्मेदारी सौंपी जाती , जिसके बारे में उसकी जानकारी बहुत कम है, तो वह क्या करता? एक दशक पहले तक उसे जानकारी के लिए धूल फांक रही किसी नियमावली का सहारा लेना होता या अपने किसी वरिष्ठ सहयोगी के खाली होने का इंतजार करना पड़ता। आज वह अपने फोन से 'आई-गॉट' यानी 'इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग' प्लेटफॉर्म पर लॉग ऑन करता है और मिनटों में उसे अपनी जरूरत के अनुरूप एक सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम मिल जाता है। शाम तक वह सूचनाओं व आत्मविश्वास से लैस होकर योजना के लाभार्थियों की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहा होता है। यह बदलाव देखने में छोटा लग सकता है, मगर हकीकत में किसी क्रांति से ...
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