रिषिकेष, मई 5 -- परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा मंगलवार को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को समर्पित रहा। कथा मर्मज्ञ भाईश्री रमेश भाई ओझा ने प्रवचन करते हुए कहा कि आज का युग विज्ञान, तकनीक और प्रगति का युग है, लेकिन इसके साथ ही मनुष्य के भीतर अशांति, तनाव और अकेलापन भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में मन की शांति और संतुलन के लिए श्रीमद् भागवत को सुनना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब धरती संकट में है और नदियां प्रदूषित हो रही हैं, तब यह समझना जरूरी है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारी माता है। यह भी पढ़ें- श्रीमद भागवत से जीवन में उत्तम कार्य करने की प्रेरणा मिलती है: डॉ. मनोहर भास्कर भागवत के प्रसंग हमें सिखाते हैं कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण द...