मेरठ, अप्रैल 2 -- भगवान शिव के 11वें रूद्र के रूप में प्रकट हुए भगवान हनुमान महाराज कलयुग के सारथी हैं। बल बुद्धि विद्या के दाता हैं जो हर-एक परिस्थिति में प्रत्येक स्थान पर और प्रतिपल अपने भक्तों पर कृपा करने के लिए तत्पर रहते हैं और पृथ्वी पर साक्षात रूप में विध्यमान हैं। ज्योतिषचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार हनुमान प्राकट्योत्सव के दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना बहुत मंगलकारी और कल्याणकारी होती है। पौराणिक दृष्टि से त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न में हनुमानजी का प्राकट्य हुआ था। प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को जन्मोत्सव हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाती है। इस बार दो अप्रैल को सुबह 7:41 बजे तक रहेगी, लेकिन उदयकालीन तिथि का ही अधिक महत्त्व है और सूर्योदयकाल के समय पूर्...
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