हथकरघे की खनक हुई खामोश, मशीनों के बढ़ते दबदबे से संकट
छपरा, अगस्त 7 -- सस्ते कपड़ों की मार से कमजोर पड़ा हथकरघा सारण में बुनकरों की संख्या लगातार घट रही पेज पांच की लीड छपरा, नगर प्रतिनिधि।हथकरघे की खनक अब खामोश होने लगी है। मशीनों के बढ़ते दबदबे से यह संकट में है। कभी सारण के जलालपुर, दिघवारा, रिविलगंज, सोनपुर प्रखंड के गांवों में हथकरघे की खट-खट की आवाज रोजगार और आत्मनिर्भरता की पहचान हुआ करती थी। घरों में लगे करघों पर दिन-रात कपड़े बुने जाते थे और कई परिवारों की रोजी-रोटी इसी हुनर से चलती थी। अब हालात बदल गए हैं। मशीनों की रफ्तार, पावरलूम के बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार में सस्ते कपड़ों की बढ़ती उपलब्धता ने हथकरघा बुनकरों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। सारण में गिने-चुने हथकरघा बुनकर ही अब सक्रिय हैं। पिछले करीब एक दशक में 70 फीसदी गिरावट आई है जो बुनकर इस परंपरागत पेशे से ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.