रांची, मार्च 14 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 29 साल पुराने हत्या मामले में तीन अभियुक्तों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने कहा कि केवल एक गवाह के बयान के आधार पर किसी अपराध को संदेह से परे सिद्ध नहीं किया जा सकता, इसलिए निचली अदालत का फैसला टिक नहीं सकता।खंडपीठ ने खूंटी की निचली अदालत के 4 फरवरी 1998 को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 5 फरवरी 1998 को दिए गए सजा के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से केवल एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही पर निर्भर था और उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपियों क...
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