नई दिल्ली, मार्च 27 -- दहेज के मामलों में महिलाओं की मौत की घटनाओं को समाज पर गहरा धब्बा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती हैं। पीठ ने कहा कि दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में उच्च न्यायालय को अपने विवेक का इस्तेमाल करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने दहेज से जुड़ी एक मौत के मामले में एक व्यक्ति की जमानत रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय का आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।हाईकोर्ट का आदेश अनुचित पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश पूरी तरह से अनुचित और कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है। शीर्ष...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.